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Showing posts from 2014

पाकिस्तान का मोदी 'डर'

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भारत में चुनावी सरगर्मियां चल रही हैं और 16 वीं लोकसभा चुनने के लिए वोटिंग जारी है सर्वे कयास लगा रहे हैं कि भारत में इस बार मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बन सकती है लेकिन इस खबर को लेकर पाकिस्तान डरा और सहमा हुआ है उसे डर है कि अगर वो नापाक चाल चलता है तो वो चाल कहीं टेढ़ी न पढ़ जाए तभी तो पहले पाकिस्तान की तरफ से पाक गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान का बयान आता है कि मोदी अगर देश के प्रधानमंत्री बने तो भारत पाकिस्तान के रिश्ते सुधरने के बजाए बिगड़ जाएंगे चलिए आपको याद दिला देते हैं कि पाक गृह मंत्री का ये बयान मोदी के उस बयान के बाद आया है जिसमें मोदी ने कहा था कि भारत दाऊद इब्राहिम को लाने के लिए बात करने के बजाए... सीधे अमल करेगा... गृहमंत्री के बयान के बाद जब बवाल मचा तो भारत में ही पाक उच्च दूतावास से बयान आया कि भारत में किसी की भी सरकार बने उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन अब भारत को उकसाने वाला बयान एक बार फिर पाकिस्तान की सर जमी से भारत के लिए आया है ऐसा बयान जिसने भारत की नब्ज पर चोट की है... एक ऐसा बयान जिसने भारत के एक अभिन्न हिस्से पर आघात किया है एक ऐसा बयान जिसने भ...

मोदी के 3 वादे, मेरे 3 सवाल

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हमारे देश में राजनीति की एक अजीब कवायद है कि नेता देश की जनता से वादे तो करते हैं लेकिन उनको पूरा कब करेंगे , से करेंगे ये नहीं बताते और फिर जब जीत जाते हैं तो घड़ी की सुइयां वादों का इंतज़ार करते करते घूमती रहती हैं और समय के साथ जनता उसे भूल जाती है फिर अगला चुनाव आता है और वही वादे घूम फिर के फिर से आ जाते हैं... एसी हो गई है हमारे देश की पॉलिटिक्स देश में मोदी की लहर है और सर्व बता रहे हैं कि मोदी देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो फिर देश की जनता मोदी से तीन सवाल पूछना चाहती है पहला सवाल है कि मोदी कश्मीर से धारा 370 को कैसै हटाएंगे ? क्योंकि मोदी ने वादा किया था कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने पर विचार किया जाएगा और कश्मीरी पंडितों को उनका हक दिलाया जाएगा लेकिन सवाल ये है है कि ये होगा कैसे क्या कश्मीर के आवाम की अनदेखी की जाएगी या फिर कश्मीर को फिर से आग में तपने के लिए छोड़ दिया जाएगा ताकि कश्मीरी पंडितों को इंसाफ मिल सके मान लेते हैं कि कश्मीरी पंडितों को भी उनका हक मिलना चाहिए क्योंकि वे भी भारत के नागरिक हैं लेकिन कश्मीर का मुद्दा इतना जटिल है तो मोदी के पास ...

फिर ‘डर्टी’ पॉलिटिक्स क्यों?

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कहते हैं यहां दरारों में झांकना तो सब चाहते हैं... लेकिन दरवाजा खोल दो तो कोई देखने भी नहीं आता...  ये चंद लाइनें आज की राजनीति पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं क्योंकि गंदी हो चुकी पॉलिटिक्स में अब मर्यादा का भी ख्याल नहीं रखा जाता और सिर्फ दूसरों के घर में पड़ी दरारों में ही झांका जाता है इसी वजह से गंदे बयानों के तीर अब मर्यादाओं को लांघते हुए राजनीति के सीने को चीरते दिखाई पड़ते हैं ये कैसी राजनीति है जिसमें कोई किसी को बकरी कहता है तो कोई किसी को चूहा हद तो तब हो जाती है जब राजनीति में राक्षस और शैतान जैसे शब्दों का खुले तौर पर सार्वजनिक मंच से प्रयोग किया जाता है... सारी मर्यादाएं को भूलकर नेता निजी हमले करने से भी नहीं चूकते क्योंकि वो निजी हमला उन्हें वोट दिलाएगा इसलिए तो जब मोदी ने अपनी पत्नी का नाम नामांकन में भरा तो जबर्दस्त हंगामा मचा क्योंकि मुद्दा यहां झूठ और सच साबित करने का था चाहे वो पर्सनल ही क्यों न हो तो बीजेपी भी कम नहीं है उसने भी प्रियंका के पति राबर्ट वाड्रा के ज़रिए पूरे गांधी परिवार को घेरने की प्लानिंग बना ली और एक वीडियो सीडी के ज़रिए वाड्रा को जम...

तीखी बात : माननीयों कुछ तो शर्म करो...

तीखी बात : माननीयों कुछ तो शर्म करो... : राष्ट्रपति ने कहा कि संसद लोकतंत्र की गंगोत्री होती है लेकिन गंगा इतनी तेज और काली होकर बहेगी ये तो पता ही नहीं था... सांसद राष्ट्रप...

माननीयों कुछ तो शर्म करो...

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राष्ट्रपति ने कहा कि संसद लोकतंत्र की गंगोत्री होती है लेकिन गंगा इतनी तेज और काली होकर बहेगी ये तो पता ही नहीं था... सांसद राष्ट्रपति के भाषण की इतनी जल्दी धज्जियां उड़ा देंगे ये तो पता ही नहीं था, संसद लोकतंत्र का मंदिर है जो ऐसे कलंकित होगा इसका अंदाजा ही नहीं था लेकिन ऐसा हुआ भी और देश ने देखा भी लेकिन जिस संसद की दीवारें इतने सालों से खड़ी हुई हैं उसने इस मिर्ची कांड को देखकर क्या सोचा होगा ये मैं भी सोच रहा हूं... देश का आम आदमी सोच रहा है एक पत्रकार सोच रहा है... लेकिन ये राजनेता कब सोचेंगे इसका पता ही नहीं... संसद में इतने बिल पास हुए एक तेलंगाना के बिल पर इतना हंगामा मचा कि संसद की गरिमा ही कलंकित हो गई। सांसद संसद के अंदर ही एक दूसरे को मारने पर उतारू हो गए और एक दूसरे की आंखों में मिर्ची डालने से भी नहीं चूके.... कहते हैं कि राजनीति जो न कराए वो थोड़ा है लेकिन इस कलंकित राजनीति में ये संभव तो था कि आपस में बैठकर इस तेलंगाना के मुद्दें को सुलझा लिया जाता तो शायद काली हो चुकी राजनीति में संसद की गरिमा तो बची रहती। यहां पर देश की आम जनता के चुने हुए नुमाइंदे आते हैं जिन...