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बजट ने उम्मीदों का 'बोझ' बढ़ा दिया.. कब तक सहना होगा?

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मोदी सरकार ने अपने 5 साल के कालखंड का आखिरी बजट पेश किया.. उम्मीद थी कि 18 से 35 साल तक के युवाओं के लिए बजट में कुछ होगा.. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ... चलो कोई बात नहीं.. किसान के लिए तो किया.. किसान देश में बहुत ज्यादा परेशान है.. उनके लिए बजट में बहुत घोषणाएं की गई हैं.. किसानों के लिए समर्थन मूल्य यानि MSP को डेढ़ गुना करने की बात की गई है.. लेकिन मेरा सवाल सिर्फ इतना है.. कि अगर सरकार को MSP बढ़ानी थी तो स्वामी नाथन की रिपोर्ट तो आपके पास 2014 में भी थी आज खुद स्वामी नाथन 90 साल के करीब हो चुके हैं.. तो क्या ये नहीं होना चाहिए था.. कि किसानों की हालात को देखते हुए.. 2014 में ही स्वामी नाथन की रिपोर्ट के हवाले से डेढ़ गुना MSP बढ़ा दिए होते... पहली साल में नहीं तो दूसरे साल में बढ़ा दिए होते.. तो सरकार का आखिरी समय आते आते शायद किसानों की हालत सुधर जाती.. लेकिन ये क्या कि किसानों की हालत भी वहीं के वहीं रही.. और युवा भी रोजगार को ढूंढते रह गए... सरकारें सभी काम करती हैं.. लेकिन सबसे ज्यादा शासन करने वाली सरकार की ज़िम्मेदारी सबसे ज्यादा होती है इसमें भी कोई दोराय नहीं है.. लेकिन...

कासगंज दंगा पर मेरी कलम से ‘तीखी बात’

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कासगंज में जो दंगा हुआ वो पूरी तरह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण था.. कासगंज में ऐसा कभी नहीं हुआ कि दंगा हुआ हो.. ये मैं इसलिए कह रहा हूं कि सबसे पहले मैं आपको बता दूं कि मैं उसी कासगंज का निवासी हूं और कासगंज में रहते मुझे आज 30 साल हो गए हैं.. लेकिन 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस की तनतनी को छोड़कर मैंने कभी नहीं देखा कि कासगंज में कभी कोई दंगा हुआ हो.. लेकिन अब चूंकि मैं एक पत्रकार भी हूं इसलिए मैने एक पत्रकार की तरह पूरी ग्राउंड रिपोर्ट को हैड ऑफिस में बैठकर कवर किया है.. और ग्राउंड रिपोर्टिंग से आई तस्वीरों से ये बात साफ है कि तिरंगा यात्रा चंदन गुप्ता और उसके साथियों की तरफ से निकाली जा रही थी.. और तिरंगा यात्रा निकालना इस देश में गुनाह नहीं है इस बात से सभी इत्तफाक रखते हैं... जिस तिरंगे में केसरिया जो कि भगवा रंग होता है.. हरा जिसे मुसलमान अपने धर्म से जोड़ते हैं और सफेद जो कि शांति का प्रतीक है.. और उसी सफेद से नेता एक नेता बनता है और उसी नेता से ये उम्मीद की जाती है कि वो देश को शांति (सफेद) देगा.. समृद्धि (हरा) देगा.. और खुशहाली (केसरिया) देगा.... लेकिन ये देश का दुर्भाग्य है कि...