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Showing posts from February, 2013

अपने आप को “भारतीय” समझो बुखारी साहब !

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हिन्दुस्तान में रहने वाले हर धर्म के लोगों का मजहब सिर्फ हिन्दुस्तानी है तो पाकिस्तान पर उंगली उठाने पर चंद कुछ लोगों का खून क्यों खौल जाता है क्या वे अपने आप को हिन्दुस्तानी नहीं मानते या हिन्दुस्तान में रहकर सिर्फ पाकिस्तान की बात करते हैं एक बात मुझे समझ नहीं आती जब हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली जैसे विस्फोटों की आंच पाकिस्तान तक गई तो क्यों हिन्दुस्तान के चंद कुछ मुस्लिम इसे मुस्लिम विरोधी करार देते हैं क्या ये सच नहीं है। कि भारत में हुए हर आतंकवादी गतिविधियों में सिर्फ पाकिस्तान का ही हाथ होता है अगर ये सच नहीं है तो क्यों एनआईए और रॉ जैसी प्रमुख इंटेलीजेंस एजेंसियों ने सिर्फ पाकिस्तान के संगठनों के हाथ होने के सबूत दिए हैं। मैं अपने मुस्लिम भाइयों को बता दूं कि ये एक इत्तिफाक है कि पाकिस्तान एक मुस्लिम राष्ट्र है अगर वो हिन्दू राष्ट्र या ईसाई राष्ट्र भी होता तो भी उंगली उतनी ही उठती जितनी अब उठ रही है फिर क्यों हिन्दुस्तान में रहने वाले मुसलमान उस इंडियन मुजाहिद्दीन का इतना साथ देते हैं जो भारत में कत्लेआम का जिम्मेदार है भारत में रहने वाले हर नागरिक का कर्तव्य है कि वो भारत में शान...

ब्लास्ट हो गया है तो क्या, मैं नहीं छोड़ूंगा “कुर्सी” !

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हैदराबाद में दो बम ब्लास्ट हो गए हैं पूरी लापरवाही होने के बावजूद नेता अपनी कुर्सी को पकड़ कर बैठे हैं किसी भी हाइअलर्ट शहर में कोई निगरानी दिखाई नहीं दे रही है जैसा ब्लास्ट के पहले चल रहा था वैसा अब भी चल रहा है सरकार के रवैये में सुस्ती तो अब भी दिखाई दे रही है और तो और सरकार को पता ही नहीं कि अब उसे क्या करना चाहिए बम ब्लास्ट के बाद अब जो कुछ भी हो रहा है वो मामले को हल्का करके ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है और मैं ये भी जानता हूं कि वो इस मंसूबे में कामयाब भी हो जाएंगे क्योंकि ऐसा इस बार नहीं, हर बार होता आया है क्या हम जानते नहीं है कि भारत में अब तक कितने ब्लास्ट हो चुके हैं और कितने लोगों की जानें जा चुकी हैं लेकिन नतीजा वही सिफर, अगर कोई आतंकवादी पकड़ भी लेते हैं तो उसे फांसी पर चढ़ाने में इंतज़ार की घड़ियां बीत जाती है और उस ब्लास्ट में मरने वाले और घायल लोगों के परिजन भी इंतजार करते करते आस खो देते हैं आखिर ये क्या सिस्टम है कि पहले तो एक आतंकवादी को खुद सरकार आतंकवादी घोषित करती है और बाद में उसको फिर से आतंकवादी घोषित करने के लिए कोर्ट में भी साबित करना पड़त...

प्यार की कोई समय - सीमा नहीं होती....

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   अंग्रेजी सभ्यता में प्यार का सप्ताह कहे जाने वाला वेलेन्टाइन वीक चल रहा है इस दिन ज्यादातर युवा जोड़े वेलेन्टाइन मनाते हैं और जो अपने नए प्यार को ज़ाहिर करना चाहते हैं उन्हें वो लब्ज़ों में नहीं इस सप्ताह के दिनों के रिति रिवाज के हिसाब से इज़हार करते हैं  प्यार का सप्ताह कहे जाने वाला ये सप्ताह वाकई सही मायनों में प्यार का सप्ताह है ये तो मैं नहीं जानता लेकिन मैं इतना मानता हूं कि प्यार किसी समय सीमा का मोहताज नहीं होता और उसे दिनों के बंधन में नहीं रखा जा सकता, लेकिन आजकल प्रेम की परिभाषा और तरीके बदल गए हैं इस प्यार के हफ्ते के दिनों में प्यार करने वाले युवा जोड़े अपने दिल की बातों को खूब दिनों के हिसाब से इज़हार करते हैं लेकिन वो सिर्फ इस हफ्ते ही करते हैं या यही प्यार आगे भी बना रहता है ये सवाल ज़रूर है... प्यार तो युगों युगों से चला आ रहा है ऐसे कई किस्से हैं जिनमें सच्चा प्यार झलकता है उसमें सबसे अनूठा और उत्कृष्ट उदाहरण है भगवान श्री कृष्ण और राधा का,  ऐसा प्यार करने वाले शायद ही कुछ लोग होते होंगे और शायद मुझे तो मिले ही नहीं.... प्यार एक वो शब्द है ...

बेगुनाह लड़के को मिली सज़ा का ज़िम्मेदार कौन होगा ?

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देश को कलंकित करने वाला दिल्ली रेप कांड मामले के बाद और रेप मामले में जस्टिस वर्मा की कुछ सिफारिशों को लागू करने के लिए चल रहे महिला संगठनों के दबाव से देश में एक नई बहस शुरु हो गई है जिस पर देश एक अजीब सी स्थिति से गुजर रहा है कि सेक्सुअल हरसमेंट के मामले में क्या कड़े कानून बनाए जाएं और किस कानून से क्या नुकसान हो सकते हैं और उसके दुरुपयोग क्या हैं इन सभी पर विचार करने के लिए सरकार ने एक जस्टिस वर्मा आयोग का गठन किया जिसके बाद सरकार ने जस्टिस वर्मा आयोग की कुछ सिफारिशों को नकारते हुए बाकी सभी सिफारशें मान लीं लेकिन जो सिफारिशें सरकार ने नहीं मानीं उन पर अब सवाल उठने शुरु हो गए हैं  जिसको लेकर लोग अपने तरीके से प्रदर्शन भी कर रहे हैं आपको पहले में बता दूं कि सरकार ने जो शर्तें नहीं मानी हैं उनमें प्रमुख रुप से मेरिटल केस में भी रेप होने का मामला, साथ ही सिर्फ लड़की पर ही बलात्कार का केस, और सेना में बलात्कार के आरोपों पर सजा का मामला, ये ऐसे मामले हैं जो अपने आप में सीधे तो नहीं है काफी गहन विचार करने की इन मामलों पर ज़रुरत हैं जस्टिस वर्मा ने मेरिटल केस पर जो सिफारिश दीं उसमें...

हिंदू, मुसलमान छोड़ो, मंहगाई से निजात दिलाओ...

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भारत के सभी राजनीतिक गलियारों में सिर्फ एक ही बहस छिड़ी हुई है कि 2014 का प्रधानमंत्री कौन बनेगा कांग्रेस में कुछ लोग कहते हैं कि राहुल गांधी बनेंगे तो बीजेपी में कुछ लोग कहते हैं कि मोदी का नाम सबसे ऊपर है लेकिन ये दोनों पार्टियां हैं कि अपने पत्ते खोलना ही नहीं चाहती तो वहीं एनसीपी है कि शरद पंवार को प्रधानमंत्री के सपने संजोए बैठी है तो समाजवादी पार्टी एक बार अपने मुखिया मुलायम को प्रधानमंत्री बनते हुए देखना चाहती है तो मायावती कहती है कि दलितों की रक्षा के लिए उनका प्रधानमंत्री होना बहुत ज़रुरी है लेकिन आम जनता किन किन उम्मीदों भरे प्रधानमंत्री के सपने संजोकर बैठी है ये तो किसी ने नहीं सोचा लेकिन जो देश की सबसे बड़ी पार्टी हैं वो हिन्दू और मुसलमान के मुद्दों पर ही उलझी रह जाती है बीजेपी कहती है कि वो राम मंदिर बनाने को तवज्जो देती है तो कांग्रेस कहती है कि बीजेपी मुसलमान विरोधी पार्टी है लेकिन सच मायने में इन सब बातों से किसी भी आम आदमी को कोई मतलब नहीं, चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान। इन सब बातों से मतलब पड़ता है तो सिर्फ उन सियासी नेताओं को जो इस बहाने थोड़ी सी अपनी पहचान बनाना...