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Showing posts from September, 2017

'अर्थ' की बहस में 'अंधी' हुई राजनीति.. पर आप तो देखते हो ना !

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इन दिनों अर्थव्यवस्था को लेकर एक बहस छिड़ी है.. वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा कह रहे हैं कि अरुण जेटली ने अर्थव्यवस्था का कबाड़ा कर दिया... तो कांग्रेस कह रही है कि हम तो पहले से ही ये कह रहे थे.कि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था का कबाड़ा कर चुकी है.. तो वहीं मोदी सरकार इस वक्त की अर्थव्यवस्था को आर्थिक सुधारों वाला बता रही है.. लेकिन सवाल ये है कि इस सब बातों में सच क्या है जो हमारा और आपका जानना ज़रूरी है   क्या वाकई अर्थव्यवस्था का कबाड़ा हो गया है ? या फिर मोदी सरकार की अर्थव्यवस्था में दम है.. आज  के वक्त में ये जानना बहुत ज़रूर हो गया है कि आखिर कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ..  फिलहाल सच ये भी है कि अप्रैल 2014 में जारी रिपोर्ट में साल 2011 के विश्लेषण में विश्व बैंक ने ‘ क्रयशक्ति समानता ’ ( परचेजिंग पॉवर पैरिटी ) के आधार पर भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था घोषित किया था.. और बैंक के इंटरनेशनल कंपेरिजन प्रोग्राम (आईसीपी) के 2011 राउंड में अमेरिका और चीन के बाद भारत को तीसरा स्थान दिया .. 2005 में ये स्थान 10 वां था...   पर ये...

समझो सरकार... जनता ‘भगवान’ है कर्म करने पर ही फल देती है

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देश की मोदी सरकार भले ही देश के विकास के बारे में सोचती हो... विदेश में नाम कमा रही हो लेकिन ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर मोदी सरकार या कहें कि बीजेपी सरकार फेल होती दिखती है और सबसे ज्वलंत मुद्दा है जो आम आदमी से जुड़ा है वो है पेट्रोल डीज़ल के बढ़ते रेट का मुद्दा... और किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा... भले ही सरकार ने पेट्रोल डीजल के रेट तय करने का अधिकार प्राइवेट कंपनी को दे दिया हो लेकिन.. उसे ये नहीं भूलना चाहिए कि इसी पेट्रोल डीज़ल से आम आदमी की कमाई सीधे जुड़ती है महंगाई सीधे जुड़ती है... लेकिन सच तो ये है कि पेट्रोल और डीज़ल पर लगाम लगा पाने में मोदी सरकार विफल हुई है.. ये ऐसी आलोचनाएं हैं जो करनी पड़ेंगी क्योंकि शासन जब आम जनता के हित से अहित में बदल रहा हो तो उसे आइना दिखाना ज़रूरी है.. और उसी के लिए मेरा ये आज का लेख है... सवाल ये है कि पेट्रोल और डीज़ल पर रेट कम होने के बजाए बढ़ क्यों रहे हैं....         देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें अपने 3 साल के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है... जिससे उपभोक्ता चिंतित है लोग सोच रहे हैं कि पेट्रोल और डीज़ल के...

हर बात में पीएम को गाली देना कितना सही ?

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देश में एक नया ढर्रा चल पड़ा है कि कहीं किसी की हत्या हो जाए तो सीधे पीएम ज़िम्मेदार है.. कहीं कोई चींटी मर जाए तो सीधे पीएम ज़िम्मेदार है.. सवाल ये है कि क्या वााकई देश में कहीं पर भी कुछ भी घटना हो तो पीएम ज़िम्मेदार है या उस इलाके का लोकल प्रशासन ज़िम्मेदार है.. खैर इस मुद्दे पर मैं अपनी बेबाक राय रखूंगा..  लेकिन उससे पहले.उस ख़बर को आपको बता दूं जिसने इन दिनों सबसे ज्यादा हलचल मचा रखी है.. और वो है वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या... जिसने पत्रकार और राजनीति के बीच के घालमेल को बेपर्दा कर दिया है.... अपनी बेबाक राय रखने से पहले मैं आप सबको बता दूं कि मैं एक पत्रकार हूं और किसी पार्टी से मेरा कोई ताल्लुख नहीं है.. लेकिन क्या पीएम के पद की गरिमा हमें भूल जानी चाहिए.. एक आम आदमी भी जब प्रधानमंत्री का नाम लेता है तो देश की गरिमा याद आती है.. लेकिन हमारे देश के कुछ नेता..   जो हैं तो जनता के रिप्रजेंटेटिव. लेकिन  वो देश की चुनी हुई जनता के पीएम को गुंडा कहते हैं गाली देते हैं... तो क्या प्रधानमंत्री के बारे में अपशब्द कहना क्या सही है.. राजनीति अपनी जगह हो ...