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दुनिया देखेगी अब भारत का जवाब करारा होगा
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अब तो भारत बदल गया है मानो या तुम न मानो दुनिया देख रही है ताकत जानो या तुम न जानो ।। वक्त बदला है दुनिया बदली भारत भी बदला है अब दुश्मन से दो दो हाथ करने को भारत भी निकला है अब ।। अब न बच पाएगा दुश्मन ये भारत ने ठानी है शपथ ली है अब हर दुश्मन को धूल चटानी है ।। गहरा दुश्मन पाकिस्तान अब चाल नहीं चल पाएगा उसे धूल चटाने को अब, हर हिंदुस्तानी आगे आ आएगा ।। बदल दी है हमने रणनीति, बजा दी हमने रणभेरी है आतंकिस्तान को समझना होगा हमने नीति फेरी है ।। युद्ध हुआ तो अब पीओके क्या, पूरा पाकिस्तान हमारा होगा दुनिया देखेगी अब भारत का जवाब करारा होगा ।। - Written by SHASHANK GAUR shashank.gaur88@gmail.com
बजट ने उम्मीदों का 'बोझ' बढ़ा दिया.. कब तक सहना होगा?
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मोदी सरकार ने अपने 5 साल के कालखंड का आखिरी बजट पेश किया.. उम्मीद थी कि 18 से 35 साल तक के युवाओं के लिए बजट में कुछ होगा.. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ... चलो कोई बात नहीं.. किसान के लिए तो किया.. किसान देश में बहुत ज्यादा परेशान है.. उनके लिए बजट में बहुत घोषणाएं की गई हैं.. किसानों के लिए समर्थन मूल्य यानि MSP को डेढ़ गुना करने की बात की गई है.. लेकिन मेरा सवाल सिर्फ इतना है.. कि अगर सरकार को MSP बढ़ानी थी तो स्वामी नाथन की रिपोर्ट तो आपके पास 2014 में भी थी आज खुद स्वामी नाथन 90 साल के करीब हो चुके हैं.. तो क्या ये नहीं होना चाहिए था.. कि किसानों की हालात को देखते हुए.. 2014 में ही स्वामी नाथन की रिपोर्ट के हवाले से डेढ़ गुना MSP बढ़ा दिए होते... पहली साल में नहीं तो दूसरे साल में बढ़ा दिए होते.. तो सरकार का आखिरी समय आते आते शायद किसानों की हालत सुधर जाती.. लेकिन ये क्या कि किसानों की हालत भी वहीं के वहीं रही.. और युवा भी रोजगार को ढूंढते रह गए... सरकारें सभी काम करती हैं.. लेकिन सबसे ज्यादा शासन करने वाली सरकार की ज़िम्मेदारी सबसे ज्यादा होती है इसमें भी कोई दोराय नहीं है.. लेकिन...
कासगंज दंगा पर मेरी कलम से ‘तीखी बात’
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कासगंज में जो दंगा हुआ वो पूरी तरह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण था.. कासगंज में ऐसा कभी नहीं हुआ कि दंगा हुआ हो.. ये मैं इसलिए कह रहा हूं कि सबसे पहले मैं आपको बता दूं कि मैं उसी कासगंज का निवासी हूं और कासगंज में रहते मुझे आज 30 साल हो गए हैं.. लेकिन 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस की तनतनी को छोड़कर मैंने कभी नहीं देखा कि कासगंज में कभी कोई दंगा हुआ हो.. लेकिन अब चूंकि मैं एक पत्रकार भी हूं इसलिए मैने एक पत्रकार की तरह पूरी ग्राउंड रिपोर्ट को हैड ऑफिस में बैठकर कवर किया है.. और ग्राउंड रिपोर्टिंग से आई तस्वीरों से ये बात साफ है कि तिरंगा यात्रा चंदन गुप्ता और उसके साथियों की तरफ से निकाली जा रही थी.. और तिरंगा यात्रा निकालना इस देश में गुनाह नहीं है इस बात से सभी इत्तफाक रखते हैं... जिस तिरंगे में केसरिया जो कि भगवा रंग होता है.. हरा जिसे मुसलमान अपने धर्म से जोड़ते हैं और सफेद जो कि शांति का प्रतीक है.. और उसी सफेद से नेता एक नेता बनता है और उसी नेता से ये उम्मीद की जाती है कि वो देश को शांति (सफेद) देगा.. समृद्धि (हरा) देगा.. और खुशहाली (केसरिया) देगा.... लेकिन ये देश का दुर्भाग्य है कि...
ढोंगी बाबा के आदर में झुकती खाकी..! तस्वीर हैरान करने वाली है
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जहां पूरे देश में बाबाओं को लेकर बहस छिड़ी है वहीं लोग आज भी नहीं समझ रहे कि बाबाओं के चक्कर में फंसकर वो अपनी ज़िदगी बर्बाद कर रहे हैं.. दिल्ली के विवेक विहार थाने से आई ये तस्वीर तो औऱ भी ज्यादा हैरान करने वाली है जहां कोई आम आदमी नहीं बल्कि एक पुलिस वाला वो भी वर्दी में विवादित धर्म गुरू राधे मां के पास हाथ जोड़े खड़ा है.... और राधे मां उसकी कुर्सी पर बैठी हैं.. वाकई ये तस्वीर हैरान करने वाली हैं क्योंकि यहां एक पुलिस वाला ही अपनी ड्यूटी भूलकर अंध भक्ति में अपनी आस्था दिखा रहा है तो वो लोगों को क्या सुरक्षा देगा ये बड़ा सवाल है... इतना ही नहीं थाने के अंदर जुटी भक्तों की भीड़ राधे मां की जय-जयकार कर रही थी.. और हाथ में त्रिशूल लेकर अपने भक्तों के बीच अजब गजब मुद्रा को लेकर चर्चित राधे मां दिल्ली के विवेक विहार थाने में एसएचओ की कुर्सी पर बैठी नज़र आईं खाकी वर्दी की इज्जत से बेपरवाह एसएचओ संजय शर्मा भक्त की मुद्रा में हाथ जोड़े राधे मां के सामने अभिभूत से खड़े दिखाई दिए.. वर्दी के ऊपर मातारानी की चुनरी भी एसएचओ साहब ने डाल रखी थी.. ये तस्वीर नवरात्रि के समय की बताई जा रही है.. आप...
'अर्थ' की बहस में 'अंधी' हुई राजनीति.. पर आप तो देखते हो ना !
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इन दिनों अर्थव्यवस्था को लेकर एक बहस छिड़ी है.. वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा कह रहे हैं कि अरुण जेटली ने अर्थव्यवस्था का कबाड़ा कर दिया... तो कांग्रेस कह रही है कि हम तो पहले से ही ये कह रहे थे.कि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था का कबाड़ा कर चुकी है.. तो वहीं मोदी सरकार इस वक्त की अर्थव्यवस्था को आर्थिक सुधारों वाला बता रही है.. लेकिन सवाल ये है कि इस सब बातों में सच क्या है जो हमारा और आपका जानना ज़रूरी है क्या वाकई अर्थव्यवस्था का कबाड़ा हो गया है ? या फिर मोदी सरकार की अर्थव्यवस्था में दम है.. आज के वक्त में ये जानना बहुत ज़रूर हो गया है कि आखिर कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ.. फिलहाल सच ये भी है कि अप्रैल 2014 में जारी रिपोर्ट में साल 2011 के विश्लेषण में विश्व बैंक ने ‘ क्रयशक्ति समानता ’ ( परचेजिंग पॉवर पैरिटी ) के आधार पर भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था घोषित किया था.. और बैंक के इंटरनेशनल कंपेरिजन प्रोग्राम (आईसीपी) के 2011 राउंड में अमेरिका और चीन के बाद भारत को तीसरा स्थान दिया .. 2005 में ये स्थान 10 वां था... पर ये...
समझो सरकार... जनता ‘भगवान’ है कर्म करने पर ही फल देती है
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देश की मोदी सरकार भले ही देश के विकास के बारे में सोचती हो... विदेश में नाम कमा रही हो लेकिन ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर मोदी सरकार या कहें कि बीजेपी सरकार फेल होती दिखती है और सबसे ज्वलंत मुद्दा है जो आम आदमी से जुड़ा है वो है पेट्रोल डीज़ल के बढ़ते रेट का मुद्दा... और किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा... भले ही सरकार ने पेट्रोल डीजल के रेट तय करने का अधिकार प्राइवेट कंपनी को दे दिया हो लेकिन.. उसे ये नहीं भूलना चाहिए कि इसी पेट्रोल डीज़ल से आम आदमी की कमाई सीधे जुड़ती है महंगाई सीधे जुड़ती है... लेकिन सच तो ये है कि पेट्रोल और डीज़ल पर लगाम लगा पाने में मोदी सरकार विफल हुई है.. ये ऐसी आलोचनाएं हैं जो करनी पड़ेंगी क्योंकि शासन जब आम जनता के हित से अहित में बदल रहा हो तो उसे आइना दिखाना ज़रूरी है.. और उसी के लिए मेरा ये आज का लेख है... सवाल ये है कि पेट्रोल और डीज़ल पर रेट कम होने के बजाए बढ़ क्यों रहे हैं.... देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें अपने 3 साल के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है... जिससे उपभोक्ता चिंतित है लोग सोच रहे हैं कि पेट्रोल और डीज़ल के...