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Showing posts from November, 2013

सोच कर ये मेरी आंखों से पानी फूट पड़ता है...

छोड़ कर अपना देश हम कहां आ गए हैं दूर होने के ख्वाब से दिल सहम उठता है खो न जाए हम बीच बाज़ार में कहीं पर सोच कर ये मेरी आंखों से पानी फूट पड़ता है जो लोग कभी पलकों से हमें उतरने नहीं देते थे आज हम जाते हैं तो मेहमान नवाजी करते हैं कहीं खो न जाए वो प्यार उन आंखों के झरोखों से सोचकर ये मेरी आंखों से पानी फूट पड़ता है याद है हमें उंगली पकड़कर घूमते थे हम बड़े हो गए अब हाथ पकड़कर रो भी नहीं सकते अगर रो दिए तो दिल के कई बांध टूट जाते हैं सोचकर ये मेरी आंखों से पानी फूट पड़ता है कौन कहता है कि वक्त के मारे हैं हम हमें तो वक्त ने ही किस्मत के सहारे फेंक दिया है कैसे इस दिल को बताएं कि पास है सब मेरे सोचकर ये मेरी आंखों से पानी फूट पड़ता है याद आती है जब तो देख लेते हैं तस्वीरें दिल से लगाते हैं तो दि ल भी पूछ लेता है छोड़ कर अपना देश हम कहां आ गए हैं सोच कर ये मेरी आंखों से पानी फूट पड़ता है  Written by –  shashank gaur Shashank.gaur88@gmail.com

रूठा अगर मैं तुझसे तो इस कदर रुठूंगा.....

रूठा अगर मैं तुझसे तो इस कदर रुठूंगा कि तेरे शहर की मिट्टी मेरे वजूद को तरसेगी मैं चाहकर भी तेरा अब हो न पाउंगा मेरी रूह भी अगर अब तेरे प्यार को तरसेगी मैं वो नाव का किनारा हूं जिसे जरूरत तो है तेरी मैं उस किनारे पर नहीं जाउंगा जहां वजूद तेरा होगा इसे समझना न गुरूर मेरा न समझना इसे बेदर्दी मैं कहूंगा इसे इतना कि मेरे प्यार की है गल्ती एतबार किया मैंने मगर थक कर तूम मुझे भुलादोगे मैं मुश्किल से भुला पाउंगा ये मेरे प्यार की है गल्ती कहना तो मैं चाहता था पर कुछ सोचकर रुक गया क्योंकि धड़कते दिल की भी कोई जुबां नहीं होती चाहता था तू मेरी होगी और मैं तेरा बनके दिखा उंगा ऐसा हो न पाया ये किस्मत मैं समझ लूंगा रूठा अगर मैं तुझसे तो इस कदर रुठूंगा कि तेरे शहर की मिट्टी मेरे वजूद को तरसेगी Written  by – shashank gaur Shashank.gaur88@gmail.com