रूठा अगर मैं तुझसे तो इस कदर रुठूंगा.....


रूठा अगर मैं तुझसे तो इस कदर रुठूंगा
कि तेरे शहर की मिट्टी मेरे वजूद को तरसेगी
मैं चाहकर भी तेरा अब हो न पाउंगा
मेरी रूह भी अगर अब तेरे प्यार को तरसेगी
मैं वो नाव का किनारा हूं जिसे जरूरत तो है तेरी
मैं उस किनारे पर नहीं जाउंगा जहां वजूद तेरा होगा
इसे समझना न गुरूर मेरा न समझना इसे बेदर्दी
मैं कहूंगा इसे इतना कि मेरे प्यार की है गल्ती
एतबार किया मैंने मगर थक कर तूम मुझे भुलादोगे
मैं मुश्किल से भुला पाउंगा ये मेरे प्यार की है गल्ती
कहना तो मैं चाहता था पर कुछ सोचकर रुक गया
क्योंकि धड़कते दिल की भी कोई जुबां नहीं होती
चाहता था तू मेरी होगी और मैं तेरा बनके दिखाउंगा
ऐसा हो न पाया ये किस्मत मैं समझ लूंगा
रूठा अगर मैं तुझसे तो इस कदर रुठूंगा
कि तेरे शहर की मिट्टी मेरे वजूद को तरसेगी

Written  by – shashank gaur

Shashank.gaur88@gmail.com

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