कासगंज दंगा पर मेरी कलम से ‘तीखी बात’
कासगंज में जो दंगा हुआ वो पूरी तरह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण था.. कासगंज में ऐसा कभी नहीं हुआ कि दंगा हुआ हो.. ये मैं इसलिए कह रहा हूं कि सबसे पहले मैं आपको बता दूं कि मैं उसी कासगंज का निवासी हूं और कासगंज में रहते मुझे आज 30 साल हो गए हैं.. लेकिन 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस की तनतनी को छोड़कर मैंने कभी नहीं देखा कि कासगंज में कभी कोई दंगा हुआ हो.. लेकिन अब चूंकि मैं एक पत्रकार भी हूं इसलिए मैने एक पत्रकार की तरह पूरी ग्राउंड रिपोर्ट को हैड ऑफिस में बैठकर कवर किया है.. और ग्राउंड रिपोर्टिंग से आई तस्वीरों से ये बात साफ है कि तिरंगा यात्रा चंदन गुप्ता और उसके साथियों की तरफ से निकाली जा रही थी.. और तिरंगा यात्रा निकालना इस देश में गुनाह नहीं है इस बात से सभी इत्तफाक रखते हैं... जिस तिरंगे में केसरिया जो कि भगवा रंग होता है.. हरा जिसे मुसलमान अपने धर्म से जोड़ते हैं और सफेद जो कि शांति का प्रतीक है.. और उसी सफेद से नेता एक नेता बनता है और उसी नेता से ये उम्मीद की जाती है कि वो देश को शांति (सफेद) देगा.. समृद्धि (हरा) देगा.. और खुशहाली (केसरिया) देगा.... लेकिन ये देश का दुर्भाग्य है कि...