राष्ट्रपति ने कहा कि संसद लोकतंत्र की गंगोत्री होती है लेकिन गंगा इतनी तेज और काली होकर बहेगी ये तो पता ही नहीं था... सांसद राष्ट्रपति के भाषण की इतनी जल्दी धज्जियां उड़ा देंगे ये तो पता ही नहीं था, संसद लोकतंत्र का मंदिर है जो ऐसे कलंकित होगा इसका अंदाजा ही नहीं था लेकिन ऐसा हुआ भी और देश ने देखा भी लेकिन जिस संसद की दीवारें इतने सालों से खड़ी हुई हैं उसने इस मिर्ची कांड को देखकर क्या सोचा होगा ये मैं भी सोच रहा हूं... देश का आम आदमी सोच रहा है एक पत्रकार सोच रहा है... लेकिन ये राजनेता कब सोचेंगे इसका पता ही नहीं... संसद में इतने बिल पास हुए एक तेलंगाना के बिल पर इतना हंगामा मचा कि संसद की गरिमा ही कलंकित हो गई। सांसद संसद के अंदर ही एक दूसरे को मारने पर उतारू हो गए और एक दूसरे की आंखों में मिर्ची डालने से भी नहीं चूके.... कहते हैं कि राजनीति जो न कराए वो थोड़ा है लेकिन इस कलंकित राजनीति में ये संभव तो था कि आपस में बैठकर इस तेलंगाना के मुद्दें को सुलझा लिया जाता तो शायद काली हो चुकी राजनीति में संसद की गरिमा तो बची रहती। यहां पर देश की आम जनता के चुने हुए नुमाइंदे आते हैं जिन...