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Showing posts from January, 2013

तीखी बात : ताशकंद समझौते में खो गया देश का सच्चा “लाल”...

तीखी बात : ताशकंद समझौते में खो गया देश का सच्चा “लाल”... : साल 1965 में भारत के इतिहास की वो घड़ी, वो समझौता जिससे देश की आन बान शान जुड़ी थी लेकिन हुआ कुछ इतना शर्मनाक कि शायद वो इतिहास का कभी ...

ताशकंद समझौते में खो गया देश का सच्चा “लाल”...

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साल 1965 में भारत के इतिहास की वो घड़ी, वो समझौता जिससे देश की आन बान शान जुड़ी थी लेकिन हुआ कुछ इतना शर्मनाक कि शायद वो इतिहास का कभी न भूले जाने वाला पन्ना बन कर रह गया एक ऐसा नेता देश ने खोया जो शायद कभी देश को चिराग लेकर ढूंढने से भी नहीं मिलेगा  जिसके बारे में किसी ने सोचा भी न था कि देश का वो छोटे कद का लेकिन देश की नब्ज को समझने वाला प्रधानमंत्री जो ताशकंद गया था भारत की शान को बुलंदियों पर पहुंचाने के लिए, लेकिन गलत मंसूबे लिए कुछ सियासदानों ने उसे फिर दोबारा भारत की धरती पर ज़िदा कदम ही नहीं रखने दिया जी हां आपने सही सोचा यहां मैं बात कर रहा हूं देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जिन्होंने 1965 का वो युद्ध जो लाल बहादुर की बहादूरी की बदौलत और सूझ बूझ की वजह से भारत लगभग जीत चुका था और लाहौर तक हमारी सेना पूरे जोश के साथ घुस चुकी थी लेकिन कुछ सियासी चालों में फंसकर देश के अंदर बैठे कुछ गद्दारों की नापाक मंसूबों ने पासों को पलटने पर मजबूर बना दिया जिसके तहत सामने आया ताशकंद का वो समझौता जिसे देश का कोई नागरिक नहीं चाहता था हर किसी का एक ही सपना था कि जो पा...

अब नेताओं को ‘सपनों’ में भी डरा रही है सीबीआई !

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जेबीटी शिक्षक भर्ती घोटाले में हरियाणा के कद्दावर नेता ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला के साथ 51 अफसरों को सजा क्या मिली कि सभी नेताओं के कान खड़े हो गए हैं घोटाले बाज नेताओं को अब अपनी भी फिक्र सताने लगी है और सीबीआई का भूत हर किसी के सिर पर चढ़कर बोलने लगा है सूत्रों की मानों तो आजकल हालात तो ये बन गए हैं कि नेता सीबीआई हेडक्वार्टर के सामने से भी अब निकलने से कतराने लगे हैं कि कहीं सीबीआई की छाया उन पर भी न पड़ जाए... डर उनका वाकई वाजिब है भईया देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि किसी बड़े नेता को 10 साल की सजा मिली है वो भी राज्य में विपक्ष का नेता हो साथ ही छ दिन से लेकर छ साल तक मुख्यमंत्री के पद पर विराजमान रहा हो ये इतना बड़ा सबक है उन नेताओं के लिए जो कानून को अपनी जेब में रखकर घूमते हैं हालांकि ये सजा 13 साल बाद ज़रुर मिली लेकिन ये क्या कम है कि किसी सियासतदान घोटालेबाजी में तो फंस गया औऱ अदालत ने उसे सजा भी सुना दी वैसे चौटाला परिवार पर पहले से ही कई घोटालों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं लेकिन ये घोटाला है कि किस्मत खराब होने के चलते और सत्ता में न रहने क...

‘आतंकवाद’ पर सियासी कारोबार !

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हमने हमेशा देखा है कि हर आतंकवादी तो सिर्फ दहशत फैलाने के इरादे के लिए आता है और उसका मकसद सिर्फ आतंक फैलाना है चाहे उसके आतंक से हिंदू प्रभावित हो या मुस्लिम या फिर सिक्ख या ईसाई, इस देश की विडम्बना है कि इस देश में आतंकवाद को भी अब राजनीतिक पार्टियों ने सियासी कारोबार की तरह देखना शुरु कर दिया है, देश में  हिंदुओं की संख्या ज्यादा है तो उसे आतंकवादी कहने पर कांग्रेस को कोई गुरेज नज़र नहीं आता क्योंकि उसे पता है कि हिंदू वोट बैंक इतना नहीं टूटेगा साथ ही बीजेपी पर हल्ला बोलने का भी उनका मकसद पूरा हो जाएगा। लेकिन अगर ये इल्जाम अल्पसंख्यकों पर लगा दिया जाता है तो उससे सियासत में वोट बैंक का खतरा लगने लगता है कि हमारे अल्पसंख्यक भाई कहीं रूठ न जाए, हमारे देश में आखिर वोट की राजनीति का स्तर कितना गिर सकता है ये बात तो कांग्रेस ने आतंकवाद को धर्म जाति से जोड़कर दिखा दिया है लेकिन मुझे ये समझ नहीं आता कि आखिर कांग्रेस को हर हिंदू आतंकवादी क्यों दिखाई देता है जबकि बीजेपी ने तो कभी पब्लिसिटी के लिए नहीं कहा कि हर मुसलमान आतंकवादी है तो आप ही बताएं कि सैक्यूलर पार्टी होने का जो पार...

‘राजतिलक’ पर सिमटा चिंतन शिविर, कहां गई जनता की चिंता

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कांग्रेस ने इतना जोर शोर से चिंतन शिविर का आयोजन किया देश को उम्मीद थी कि कांग्रेस चिंतन शिविर में कुछ देश के मुद्दों पर हल ढूंढने के लिए जयपुर गई है, लेकिन चिंतन शिविर सिर्फ राहुल गांधी का राजतिलक करने पर ही सिमट गया। और इस चिंतन के मंथन पर सामने आए तो बस राहुल गांधी, राहुल गांधी को औपचारिक रुप से उपाध्यक्ष पद देकर उन्हें पार्टी में दूसरे नंबर के ओहदे का नेता बना दिया गया हालांकि राहुल पहले से ही पार्टी में दूसरे नंबर पर थे लेकिन अब इसकी औपचारिक घोषणा हो गई। राहुल गांधी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनते ही कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता राहुल गांधी को चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट लिए बधाइयां देते हुए पूरे चिंतन शिविर में दिखे। और जब चिंतन शिविर के दूसरे दिन राहुल गांधी उपाध्यक्ष बनने के बाद अपना पहला भाषण देने माइक पर पहुंचे तो मानो पूरे चिंतन शिविर में कांग्रेसियों की चिंता खत्म हो गई और मंथन में राहुल को प्राप्त कर सभी ने राहुल का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया। कह सकते हैं कि कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में वो बहुत हर्षोल्लास का पल था जब राहुल भाषण देने पहुंचे, राहुल गांधी ने अपने ...

पार्टी नहीं, जनता की राहत के लिए ‘चिंतन’ करो सोनिया मैडम

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कांग्रेस ने एक ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया है जिसमें वो अपने किए गए कार्यों और न किए गए कार्यों पर चिंतन करेंगी जिसमें शामिल होने के लिए कांग्रेस के बड़े से बड़े नेताओं का जमघट लगा हुआ है और भई पहुंचे भी क्यों न मैडम ने जो बुलाया है ये तो सिर्फ चिंतन शिविर की बात है अगर मैडम अपने घर पर प्रधानमंत्री को भी तलब करती हैं तो प्रधानमंत्री के पहुंचने की मजबूरी बन जाती है.. जहां तक चिंतन शिविर की बात है तो चिंतन शिविर अब चिंता शिविर बनता हुआ दिख रहा है क्यों कि इस शिविर में एक ही मुद्दा सबसे ज्यादा गर्म दिखाई दे रहा है कि आखिर क्या वजह है कि कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लग गई.. और भविष्य में अब वोट बैंक बढ़ाने के लिए क्या सियासी चालें खेली जाए, ताकि वोट बैंक दोबारा मिल जाए.. हो सकता है कि कुछ लॉलीपोप जनता को आने वाले दिनों में मिल जाए और हो सकता है कि जनता उसके झांसे में आकर भ्रष्टाचार, मंहगाई, और कालाधन जैसे मुद्दों को भूल जाए… क्योंकि अक्सर भोली आम जनता लॉलीपोप के झांसे में आकर भूल जाती है कौन सही है और कौन गलत। जिसका लाभ सियासी पार्टियां उठाती रही हैं…. वहीं बीजेपी भी इसी उम्मीद में चि...

महंगाई पर सियासी दांवपेचों से आम जनता हुई 'हलकान'

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मंहगाई पर सियासी दांवपेच से अब आम जनता हलकान हो गई है उसकी समझ में अब आता नहीं दिख रहा है कि कौन अपना है और कौन पराया किस पर भरोसा किया जाए औऱ किस पर नहीं क्या आम जनता का भरोसा करना गुनाह है या भरोसे को तोड़ना सियासतदानों का खेल, पता नहीं लेकिन सरकार के तेल कंपनियों के हाथ में तेल कारोबार सौंपने के फैसले को तो मैं खुद देखकर हलकान रह गया शायद इसलिए कि सरकार ने एक तरफ तो सिलेंडरों की संख्या में इजाफा किया तो दूसरी तरफ तेल कंपनियों को रेट बढ़ाने का पूरा अधिकार देकर आम आदमी के पीठ में खंजर घोंप दिया जिन मुसीबतों का सामना हम आम आदमी को करना पड़ता है वो कोई टाटा बिड़ला और अंबानी जैसे वीवीआईपी लोगों को तो नहीं करना पड़ता इसलिए तो ये लोग हमारे जेब का दर्द नहीं समझते इनका तो काम है कि किसी न किसी तरह जेब से पैसे निकाला जाए चाहे गरीब आदमी अपराध करने पर मजबूर हो जाए। सरकार ने अपने फैसले में तेल के रेट तय करने का अधिकार तो तेल कंपनियों को दे दिया लेकिन वो किस कदर अपनी मनमानी पर उतर आएंगे ये सोचा ही नहीं, भई सोचे भी क्यों सांठ गांठ भी तो देखनी पड़ती है आखिराकार पार्टी भी तो चलानी है नहीं करें...

सपूतों की शान का सवाल है ‘प्रधानमंत्री साहब’ ...............

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पाकिस्तान लगातार अपने नापाक इरादों से हमारे जवानों के सीने को छलनी किए जा रहा है लेकिन हम हैं कि सिर्फ बयानों के फूल उस पर बरसा रहे हैं वो हर बार एक के बाद एक चाल चल रहा है और हम उसके झूठ  को पकड़ने का गेम खेलते नज़र आ रहे हैं क्या हमने कारगिल के बाद अपनी युद्धकला छोड़ दी है या हम अब युद्ध को अंजाम देना नहीं चाहते लेकिन सवाल ये है कि नेताओं के इस बयानों के जाल में देश की रक्षा करने वाले वो वीर सपूत कब तक अपनी जान गंवाते रहेंगे क्या उनके भी बारे में कोई सोचेगा क्योंकि अगर गोलियां सिर्फ एक तरफ से चलती है तो दूसरा पक्ष सिर्फ घायल ही होता है और ये इतिहास रहा है कि शुरुआत हमेशा से ही पाकिस्तान करता है और हम सिर्फ उसका जबाव ही देते हैं और अगर हिन्दुस्तान की तरफ से जबाव की बात की जाए तो हमारी तरफ से गोलियां नहीं सिर्फ बयानों के बाण चलते हैं लेकिन सवाल ये है कि खून के जबाव में हम बयानों के बाण से काम कैसे चला सकते हैं अगर नहीं तो हिन्दुस्तान कोई कारगर कदम क्यों नहीं उठाता क्यों हमारे सैनिकों को सरकार के आदेश के इंतजार में मन को मसोस कर रह जाना पड़ता है हम भी किसी से कम नहीं है ये हम...

मै तो तेरे प्यार में गरीब हो गया ए आदम.......

मैं तो तेरे प्यार में गरीब हो गया ए आदम मुफलिसी में भी खयाल तेरा आ ही जाएगा शायद न भूल पाउं उन यादों की किश्ती को लेकिन यादों के खयालों में ये दिल ज़रुर रो जाएगा पर ये न समझना कि दु ; खी हूं मैं खयालों से ये भी न समझना कि परेशान हुं में जज्बातों से यकीन है कि दिल की आवाज को तु फिर न समझ पाएगा फिर भी हम सुनते रहे हैं शान ए मुहब्बत अक्सर कोई भुल कर कभी हमें ज़रुर पछताएगा