हमने हमेशा देखा है कि हर आतंकवादी तो सिर्फ दहशत फैलाने के इरादे के लिए आता है और उसका मकसद सिर्फ आतंक फैलाना है चाहे उसके आतंक से हिंदू प्रभावित हो या मुस्लिम या फिर सिक्ख या ईसाई, इस देश की विडम्बना है कि इस देश में आतंकवाद को भी अब राजनीतिक पार्टियों ने सियासी कारोबार की तरह देखना शुरु कर दिया है, देश में हिंदुओं की संख्या ज्यादा है तो उसे आतंकवादी कहने पर कांग्रेस को कोई गुरेज नज़र नहीं आता क्योंकि उसे पता है कि हिंदू वोट बैंक इतना नहीं टूटेगा साथ ही बीजेपी पर हल्ला बोलने का भी उनका मकसद पूरा हो जाएगा। लेकिन अगर ये इल्जाम अल्पसंख्यकों पर लगा दिया जाता है तो उससे सियासत में वोट बैंक का खतरा लगने लगता है कि हमारे अल्पसंख्यक भाई कहीं रूठ न जाए, हमारे देश में आखिर वोट की राजनीति का स्तर कितना गिर सकता है ये बात तो कांग्रेस ने आतंकवाद को धर्म जाति से जोड़कर दिखा दिया है लेकिन मुझे ये समझ नहीं आता कि आखिर कांग्रेस को हर हिंदू आतंकवादी क्यों दिखाई देता है जबकि बीजेपी ने तो कभी पब्लिसिटी के लिए नहीं कहा कि हर मुसलमान आतंकवादी है तो आप ही बताएं कि सैक्यूलर पार्टी होने का जो पार...