‘राजतिलक’ पर सिमटा चिंतन शिविर, कहां गई जनता की चिंता
कांग्रेस ने इतना जोर शोर से चिंतन शिविर का आयोजन किया देश को उम्मीद
थी कि कांग्रेस चिंतन शिविर में कुछ देश के मुद्दों पर हल ढूंढने के लिए जयपुर गई
है, लेकिन चिंतन शिविर सिर्फ राहुल गांधी का राजतिलक करने पर ही सिमट गया। और इस
चिंतन के मंथन पर सामने आए तो बस राहुल गांधी, राहुल गांधी को औपचारिक रुप से
उपाध्यक्ष पद देकर उन्हें पार्टी में दूसरे नंबर के ओहदे का नेता बना दिया गया हालांकि
राहुल पहले से ही पार्टी में दूसरे नंबर पर थे लेकिन अब इसकी औपचारिक घोषणा हो गई।
राहुल गांधी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनते ही कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता राहुल
गांधी को चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट लिए बधाइयां देते हुए पूरे चिंतन शिविर में
दिखे। और जब चिंतन शिविर के दूसरे दिन राहुल गांधी उपाध्यक्ष बनने के बाद अपना
पहला भाषण देने माइक पर पहुंचे तो मानो पूरे चिंतन शिविर में कांग्रेसियों की
चिंता खत्म हो गई और मंथन में राहुल को प्राप्त कर सभी ने राहुल का तालियों की
गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया। कह सकते हैं कि कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में वो बहुत
हर्षोल्लास का पल था जब राहुल भाषण देने पहुंचे, राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा
कि उनकी पार्टी में कोई नियम कानून नहीं हैं और जो नियम हैं भी हैं, तो वो
कांग्रेसी किसी कार्यकर्ता और नेता को पता भी नहीं होंगे, लेकिन नेताओं को पार्टी
की मर्यादा में रहकर काम करना चाहिए लेकिन ये नहीं बताया कि वो मर्यादा कौन सी है
जब नियम कानून ही पार्टी में नहीं है, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जब उन्हें
उपाध्यक्ष बनाया गया तो सभी नेता, कार्यकर्ता उन्हें बधाई देने के लिए पहुंचे,
लेकिन जब रात में मेरी मां मुझसे मिलने पहुंची तो वो रो पड़ीं उन्होंने कहा कि
सत्ता एक ज़हर की तरह है लेकिन मुझे ये बात समझ नहीं आई कि सोनिया जी राजनीति को एक
ज़हर बता रही थी या फिर गांधी परिवार के लिए राजनीति एक ज़हर जैसी है जैसा कि हमने
पहले कुछ कांग्रेस नेताओं के दु:खद उदाहरण
देखें हैं इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि भ्रष्टाचार फैलाने वाले ही
भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करतें हैं, तो शायद राहुल गांधी को या तो आंकड़े पता
नहीं है या फिर वो उस पर चिंतन करना ही नहीं चाहते कि सबसे ज्यादा भ्रष्टाचारी तो
कांग्रेस में ही हैं। खैर वो अपने भाषण में आगे बोलते गए उन्होंने अपने भाषण की
शुरुआत इतनी जबर्दस्त की थी कि देश की आवाम को भी लगा कि उनके आने से सबसे बढ़ी
चिंता बनीं महंगाई पर कुछ हल निकालने पर भी चिंतन होगा। लेकिन उनके भाषण में
पार्टी को ऊंचाई देने की कई बातें ही सुनाई दीं लेकिन उस जनता का ख्याल करना भी
उन्होंने मुनासिब नहीं समझा जो उनसे कुछ उम्मीद लगाई बैठी थी, हालांकि राहुल ने
अपनी बातों में जनता का जिक्र तो किया लेकिन वो सिर्फ वोट किस तरह मिले इस बात पर
जोर था। न तो राहुल देश की सुरक्षा पर बोले और न ही आतंकवाद पर और न ही महिला
सुरक्षा पर जिन पर उन्हें सुनने के लिए देश बेताब दिख रहा था। देश उनसे सुनना चाह
रहा था कि वो पाकिस्तान को अपने तरीके से कड़े तेवर दिखाकर कुछ आगाह करने की कोशिश
करेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा भी कुछ नहीं किया, तो देश कैसे मान ले कि आपसे कुछ
अपेक्षा की आस भी की जा सकती है आपको जब बोलना चाहिए था तो आप तब भी चुप रहे, और
जब आपको बोलने का इतना अच्छा मौका और अवसर मिला आप तब भी चुप रहे तो हम कैसे मान
लें कि देश आप पर भरोसा करके आगे बढ़ सकता है। राहुल साहब, देश की जनता को
कांग्रेस की तरक्की नहीं, देश की तरक्की चाहिए।

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