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Showing posts from December, 2012

सोचा था कि घर वापस आओगी तुम............

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हमने तो सोचा था कि तुम फिर घर पर वापस आओगी लेकिन सांसो की डोरी रास्ते में ही तोड़ दी तुमने देश तुम्हारे लिए दुआ कर रहा था देश को जगाने के बाद राहें बीच में ही छोड़ दी तुमने पूरा देश तुमसे मिलने को अब बेताब दिख रहा है लेकिन बेताबी भटकने के लिए छोड़ दी तुमने  हमें नहीं पता है कि कौन थी तुम लेकिन अंधेरों की नाव उजाले में मोड़ दी तुमने जुल्म तो कई हुए हम पर हम सहते रहे हैं डटकर लेकिन अब जुल्म की आवाज उठाने की कला छोड़ दी तुमने हमने तो सोचा था कि तुम फिर घर वापस आओगी  लेकिन सांसों की डोरी रास्ते में तोड़ दी तुमने......... भरोसा मत करो सांसों की डोरी टूट जाती है छतें महफूज रहती हैं हवेली टूट जाती हैं लड़कपन में किए वादे की कीमत कुछ नहीं होती अंगूठी हाथ में रहती है मंगनी टूट जाती है किसी दिन प्यास के बारे में उससे पूछिए जिसकी कुएं में बाल्टी रहती है और रस्सी टूट जाती है कभी एक गर्म आंसू काट देता है चट्टानों को कभी एक मोम के टुकड़े से छैनी टूट जाती है        

वाह री आवाम तूने मेरी चीख सुनी तो सही....

एक आम लड़की की आवाज़............ . वाह री दिल्ली तेरी वजह से कम से कम ये मुद्दा इतना बढ़़ा उठा तो सही,   नहीं तो न जाने कितनी लड़कियां अपने दिल में ये जख्म छुपा कर बैठी हैं । वाह री संसद तूने उस लड़की की चीख सुनी तो सही, न जाने कितनी चीखें संसद की चौखट पर आकर दम तोड़ देती हैं। वाह री मीडिया तूने आज इस मुद्दे को आवाज़ देकर उठाया तो सही, नहीं तो न जाने लोग कब जगकर सोने चले जाते हैं पता ही नहीं चलता।  वाह री पुलिस उस लड़की का दर्द देख आज तू पिघली तो सही, न जाने कितनी बार तूने उस दर्द को अपनी चौकियों पर कुचल दिया। वाह री जनता तू आज उस लड़की की मसीहा बनी तो सही, न जाने कितनी ऐसी गल्तियां तेरे सामने से होकर चलीं गई तू फिर भी सोती रही। वाह रे समाज तूने इस दरिंदगी को रोकने के लिए आवाज उठाई तो सही, न जाने कितनी बार तूने इस दरिंदगी को अपनी पनाह दी है । वाह री मां तू आज चिल्लाकर उठी तो सही, ना जाने कितनी बार तूने अपने लाल की गल्तियां छिपाने में उसकी मदद की है। वाह री दुनिया तू आज एक सुर में बोली तो सही , मैं तो न्याय की आस में चिल्लाचिल्ला कर थक ही गई थ...