सोचा था कि घर वापस आओगी तुम............
हमने तो सोचा था कि तुम फिर घर पर वापस आओगी
लेकिन सांसो की डोरी रास्ते में ही तोड़ दी तुमने
देश तुम्हारे लिए दुआ कर रहा था
देश को जगाने के बाद राहें बीच में ही छोड़ दी तुमने
पूरा देश तुमसे मिलने को अब बेताब दिख रहा है
लेकिन बेताबी भटकने के लिए छोड़ दी तुमने
हमें नहीं पता है कि कौन थी तुम
लेकिन अंधेरों की नाव उजाले में मोड़ दी तुमने
जुल्म तो कई हुए हम पर हम सहते रहे हैं डटकर
लेकिन अब जुल्म की आवाज उठाने की कला छोड़ दी तुमने
हमने तो सोचा था कि तुम फिर घर वापस आओगी
लेकिन सांसों की डोरी रास्ते में तोड़ दी तुमने.........
भरोसा मत करो सांसों की डोरी टूट जाती है
छतें महफूज रहती हैं हवेली टूट जाती हैं
लड़कपन में किए वादे की कीमत कुछ नहीं होती
अंगूठी हाथ में रहती है मंगनी टूट जाती है
किसी दिन प्यास के बारे में उससे पूछिए जिसकी
कुएं में बाल्टी रहती है और रस्सी टूट जाती है
कभी एक गर्म आंसू काट देता है चट्टानों को
कभी एक मोम के टुकड़े से छैनी टूट जाती है

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