बेगुनाह लड़के को मिली सज़ा का ज़िम्मेदार कौन होगा ?
देश को कलंकित करने वाला दिल्ली रेप कांड मामले के
बाद और रेप मामले में जस्टिस वर्मा की कुछ सिफारिशों को लागू करने के लिए चल रहे
महिला संगठनों के दबाव से देश में एक नई बहस शुरु हो गई है जिस पर देश एक अजीब सी
स्थिति से गुजर रहा है कि सेक्सुअल हरसमेंट के मामले में क्या कड़े कानून बनाए
जाएं और किस कानून से क्या नुकसान हो सकते हैं और उसके दुरुपयोग क्या हैं इन सभी
पर विचार करने के लिए सरकार ने एक जस्टिस वर्मा आयोग का गठन किया जिसके बाद सरकार
ने जस्टिस वर्मा आयोग की कुछ सिफारिशों को नकारते हुए बाकी सभी सिफारशें मान लीं
लेकिन जो सिफारिशें सरकार ने नहीं मानीं उन पर अब सवाल उठने शुरु हो गए हैं जिसको लेकर लोग अपने तरीके से प्रदर्शन भी कर
रहे हैं आपको पहले में बता दूं कि सरकार ने जो शर्तें नहीं मानी हैं उनमें प्रमुख
रुप से मेरिटल केस में भी रेप होने का मामला, साथ ही सिर्फ लड़की पर ही बलात्कार
का केस, और सेना में बलात्कार के आरोपों पर सजा का मामला, ये ऐसे मामले हैं जो
अपने आप में सीधे तो नहीं है काफी गहन विचार करने की इन मामलों पर ज़रुरत हैं
जस्टिस वर्मा ने मेरिटल केस पर जो सिफारिश दीं उसमें उन्होंने कहा कि अगर पति अपनी
पत्नी पर जबरदस्ती यौन संबंध बनाने पर मजूबूर करता है तो वो रेप है। लेकिन मैं
इससे सहमत नहीं हूं और शायद सरकार भी इससे सहमत नहीं दिखाई दी क्योंकि जब आप एक
विवाह के बंधन में बंध जाते हैं तो पति पत्नी एक दूजे के लिए हो जाते हैं उसमें
आपसी समझौते में ही भलाई है बशर्ते उस विवाह में तलाक शामिल न हुआ हो उसमें क्यों
किसी एसे कानून को लागू किया जाए जो घर को बर्बाद करने की बात करता हो जस्टिस
वर्मा कमेटी कैसे कह सकती है कि इस कानून का दुरुपयोग नहीं होगा, क्या उन्होंने इस
कानून के दुरुपयोग के परिणाम के बारे में कभी सोचा, शायद नहीं क्योंकि इस कानून के
बाद ऐसे कई मामले सामने आएंगे जिसमें पत्नियों के पति पर गलत आरोप लगेंगे, और
मामला कुछ पेचीदा होने से पति कोई सबूत पेश नहीं कर पाएगा और फंस कर रह जाएगा उसका
जिम्मेदार कौन होगा.. पत्नी अपने किसी प्रेमी को पाने के लिए पति पर झूठा आरोप
लगाएगी उसका जिम्मेदार कौन होगा.. वहीं एक औऱ कानून जस्टिस वर्मा ने अपनी
सिफारिशों में दिया कि रेप केस केवल लड़कियों पर ही लागू होगा तो शायद जस्टिस
वर्मा ये भूल गए कि सेक्सुअल हरसमेंट का शिकार लड़के भी हो जाते हैं ये बात ठीक है
कि ज्यादातर रेप पीड़ित लड़कियां ही मिलती हैं लेकिन कुछ मामले ऐसे भी होते हैं
जिनमें लड़के भी सेक्सुअल हरसमेंट का शिकार हो जाते हैं तो क्या वो अपने ऊपर हुए
हरसमेंट की शिकायत नहीं कर पाएंगे क्या उन्हें न्याय नहीं मिलेगा जबकि इस तरह के
केस को प्रदर्शित करने के लिए बॉलीवुड में भी एक फिल्म आई थी जिसका नाम “एतराज” था उसमें ये बताया गया कि
लड़के ही गलत नहीं होते बल्कि लड़कियां भी गलत होती हैं ये बात जस्टिस वर्मा ने
क्यों नहीं देखी और अगर उन्होंने ये फिल्म नहीं देखी है तो उन्हें ये फिल्म ज़रुर
देखनी चाहिए... क्योंकि ये फिल्म भी एक तरह के लोगों को प्रदर्शित करती है मैं
मानता हुं कि बलात्कार का केस अमूमन लड़कियां हीं लगाती हैं लेकिन जब कोई लड़का इस
बाबत आरोप लगाता है और वो वो बेगुनाह होने के बावजूद सजा का हकदार हो जाता है जबकि
सारी गल्ती लड़की की होती है तो फिर उसका जिम्मेदार कौन होगा। ये एक लड़का और
लड़की के बीच गहरी खाई खोदने वाली बात होगी जिसके बाद कुछ लड़कियां अपने फायदे के
लिए लड़कों को ब्लैकमेल भी करेंगी तो उसका जिम्मेदार कौन होगा... ऐसे कई सवाल है
जिन्हें महिला संगठन को भी सोचने की ज़रुरत है और सरकार को भी, क्योंकि कोई भी ऐसा
कानून बनाने के लिए जो समाज के लिए हो पोजिटिव और निगेटिव दोनों पहलुओं को सोच कर
ही चलना चाहिए अगर उसके दुरुपयोग पर नज़र नहीं डालेंगे तो कई और समस्याएं मुंह
फैलाएं हम सबके सामने खड़ी हो जाएंगी
Shashank.gaur88@gmail.com
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