चुनाव की “किचकिच” में नरेश “जी” की फिसली ज़ुबान

कहते हैं कि एक बार जुबान फिसल जाए तो उसके शब्द वापस नहीं होते लेकिन नेताओं पर ये जुमला काम नहीं करता और जब खासकर चुनाव की किचकिच बढ़ी हो तो अक्सर नेताओं की जुबान भी उस पर फिसलने लगती है कुछ ऐसी ही बदजुबानी की है सपा के महासचिव नरेश अग्रवाल ने... जो मोदी पर जुबानी हमला बोलने के चक्कर में अपनी मर्यादा ही भूल गए... जल्दी जल्दी में नरेश अग्रवाल ने इतनी घटिया बयानबाजी की.. कि हम वो आपको बता भी नहीं सकते नरेश अग्रवाल ने मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि जिस बीजेपी में शादी का चलन ही नहीं है वो परिवार का मतलब क्या समझेगी.. वहीं उन्होंने जल्दी जल्दी में मोदी के कुंआरे होने पर भी कई जुमले कस दिए और मोदी पर टिप्पणी करते करते वो इतने आगे बढ़ गए कि महिलाओं पर भी अभद्र टिप्पणी कर गए.. जिसको लेकर अब महिला आयोग काफी सख्त हो गया है और महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने नरेश अग्रवाल को नोटिस भेजने की बात भी कह दी है वहीं अब जब मोदी पर नरेश अग्रवाल ने हमला बोला है और बोलने के बाद वो खुद ही अपने बयान में फंस गए हों तो भला बीजेपी के नेता कैसे चुप बैठ सकते हैं... नरेश अग्रवाल के आपत्तिजनक बयान के बाद बीजेपी ने भी तुरंत पलटवार कर दिया.. बीजेपी की तरफ से प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि समाजवादी पार्टी अपने गिरेबान में झांके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि ये लोग वंशवादी राजनीति करते हैं। उनको कैसे पता चलेगा की लोकतंत्र क्या होता है। तो उधर बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि नरेश अग्रवाल का ये बयान बचकाना है और दुर्भाग्यपूर्ण है। और नकवी ने नरेश अग्रवाल से माफी मांगने की बात कह डाली और ठीक भी है माफी तो मांगनी चाहिए क्योंकि बयान में इतनी मर्यादाएं जो तोड़ी गई हैं लेकिन मेरी एक बात समझ में नहीं आती कि ये नेता इतना हमला क्यों बोलते हैं और जब मुंह से बोलते हैं तो उसमें मर्यादाएं क्यों तोड़ते हैं इस बयानबाजी पर तो मुझे एक अपनी लिखी हुई कविता याद आ रही है -
बोलता है तू - तो इतना गंदा बोलता है ,     
मन करता है कि तेरा गमछा ही फाड़ दूं
Shashank.gaur88@gmail.com

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