डेमोक्रेसी के गले नहीं उतर रही ब्यूरोक्रेसी

एसडीएम दुर्गा नागपाल के निलंबन पर देश में एक सियासी उबाल आया हुआ है देश की जनता के साथ सियासी पार्टियां भी दुर्गा नागपाल के निलंबन को गलत बता रही हैं लेकिन यूपी की सपा सरकार ब्यरोक्रेसी के आगे डेमोक्रेसी को झुकाना नहीं चाहती  क्योंकि कहीं न कहीं उसे डर है कि अगर वो आईएएस दुर्गा नागपाल का निलंबन वापस लेती है तो उसकी प्रदेश की जनता के सामने बहुत किरकिरी होगी और हो सकता है कि अब वो किसी आईएएस को डराने और धमकाने में कामयाब भी न हो पाए हम बचपन से सुनते आए हैं कि आईएएस की कलम में ताकत होती है लेकिन अब हमने दुर्गा नागपाल की ताकत भी देख ली है और स्वार्थ के लिए उसका निलंबन भी.. क्योंकि अब देश में आईएएस की कलम नहीं राजनीति की चालें पैनी हो चली हैं। दुर्गा नागपाल पर इतना सियासी घमासान मचा हुआ है कि हर कोई नेता इस घमासान में उतरकर गोता तो लगाना चाह रहा है लेकिन ब्यूरोक्रेसी औऱ डेमोक्रेसी के टकराव को कम करने के बारे में नहीं सोच रहा इस गंगा रुपी सियासी बहस में अब यूपीए की महान अध्यक्षा सोनिया गांधी भी उतर आई हैं औऱ उन्होंने पीएम को एक खत लिखा है ताकि दुर्गा नगपाल को न्याय मिल सके लेकिन कुछ नेता इस खत पर हंस रहे हैं उनका कहना है कि उन्हें खत की क्या ज़रूरत पड़ गई अगर वो मौखिक ही कह देती तो उनके कठपुतली पीएम उनकी सुन लेते वहीं कुछ नेता उनके इस खत पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं कि सोनिया गांधी को अगर ब्यूरोक्रेसी की इतनी चिंता हो गई तो अपने दामाद राबर्ट वाड्रा के फंसने पर ईमानदार आईएएस अशोक खेमका का कैसे ट्रांसफर कर दिया गया जब सोनिया गांधी की यूपीए सरकार में ऐसा होगा तो छोटी छोटी सरकार तो सिर पर चढ़कर ही नाचेंगी। सपा सरकार ने तो केंद्र की कांग्रेस से एक कदम आगे ही तो बढाया है कांग्रेस ने तो एक ईमानदार की आवाज़ दबाने के लिए ट्रांसफर ही किया था लेकिन सपा सरकार ने तो आईएएस को निलंबित ही कर दिया और तर्क दिया कि दुर्गा नागपाल को निलंबित करना ज़रूरी था लेकिन सपा के इस ज़रूरी शब्द की पोल उन्हीं के नेता नरेंद्र भाटी ने खोल कर रख दी जब भाटी ने गर्व करते हुए कहा था कि उन्होंने आईएएस का निलंबन महज 41 सैंकेंड में करा दिया इस भाषण को देश ने सुना भी औऱ भाषण में राजनीति का दलदल भी देखा हालांकि देश की सभी पार्टियां दुर्गा नागपाल की बहादुरी की तारीफ कर रही हैं लेकिन वो तारीफ क्या राजनीति से प्रेरित है ये भी देश को समझना ज़रूरी है सियासी दल अपनी सहानुभूति दुर्गा नागपाल पर दिखा रहे हैं लेकिन ब्यूरोक्रेसी को इस दलदल से दूर करने पर अपनी चुप्पी साधे हैं  हालांकि एसडीएम दुर्गा नागपाल के निलंबन पर सियासी गलियारों में जो हलचल दिखाई दे रही है उस हलचल से तो लगता है कि हम एक नए सिरे से बनने वाले प्रशासनिक ढांचे की ओऱ बढ़ चले हैं लेकिन जिस तरीके से कुछ सालों में ब्यूरोक्रेसी और डेमोक्रेसी में जो टकराव देखने को मिला हैं उससे देश शर्म भी महसूस भी कर रहा है ।
shashank.gaur88@gmail.com

Comments

SHASHANK GAUR said…
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